Shati Nag ji Sheta dhar Full Story

सराज घाटी के प्राचीन देवता शैटीनाग की कोठी बालीचकी तहसील के इलवाण क्षेत्र के बूग गांव में स्थापित है। मंडी जिला मुख्यालय से इसकी सड़क वर्ग से दूरी लगभग 135 कि.मी. है। कोठी सड़क के साथ ही सटी है और इस प्राचीन देवता की कोठी में देव मोहरे रखे गए हैं।

देवता की उत्पति को लेकर एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है के गांव कटवाणु से कटदरा खानदान का एक व्यक्ति शियाटधार में भेडें कराया करता था। एक दिन वह भेड़ों को विश्राम करवाने उस त्वान पर ले गया जहां आज देवता का मंदिर स्थित है और सां भी वह वहां पर विश्राम करने लगा। नींद आ जाने पर से सपने में देव शक्ति का आभास हुआ। उसमें श्री देव हेयाठी नाग ने उसे अपना परिचय दिया और कहा कि मेरा मंदिर इसी स्थान पर बनाया जाए। उसे यह भी कहा कि जब तुम घर वापस भेड़ें लेकर जाओगे तो इसे मुड़कर मत देखना।

बंद से जागने के उपरांत वह व्यक्ति भेड़ें लेकर चापस लौटने लगा और रास्ते में आगे बढ़ने पर सकी भेड़ों की संख्या भी बढ़ने लगी। भेड़ों की संख्या बहुत ज्यादा हो गयी और हलचल बढ़ने पर उससे रहा नहीं गया तथा जोगी पत्थर के समीप उसने मुड़कर पीछे देख लिया। उसके देखते ही देव शक्ति से बढ़ी हुई सभी भेड़ें वहीं पर स्चर के रूप में परिवर्तित हो गयीं जो जोगणी के भाऊण के पास आज भी बैजूद है।

घर पहुंचने पर उसने यह वृतांत लोगों को सुनाया और इसके उपरांत उसी स्थान पर जाकर चार बढ़ के लोगों ने एक मंदिर का निर्माण करवाया। इसके पश्चात देवता का मोहरा भी तैयार किया गया। यह मोहरा करंडी में खा गया और मधाह गांव के गूर को इसकी देखभाल की जिम्मेवारी दी थी। सदियों के उपरांत देवता का रथ भी तैयार किया गया। रथ में तेरा मोहरा खडूल गांव के ठठार सिय-वियु द्वारा निर्मित किया गया। स्वस्थ को चेली कहा जाता है और अब देवता रथ पर ही चार बढ़ में परेकामा करता है। शियाट धार में प्रकट होने के कारण इनका नाम या शिटी) नाग रखा गया।

Naman Sharma

not a professional historian or writer, but I actively read books, news, and magazines to enhance my article writing skills

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