व्यास और पार्वती के संगम की 2464 मीटर ऊँची पहाड़ी पर Bijali mahadev मंदिर स्थित है। पहाड़ी शैली में निर्मित यह आयताकार मंदिर ग्यारह मीटर लंबा और लगभग साढ़े सात मीटर चौड़ा है। दीवारें लकड़ी और पानी-गारा रहित चिनाई से निर्मित हैं। गर्भगृह के ऊपर ढलवाँ छत है। बिजली महादेव के छत के ऊपर लंबे शहतीर पर अनेक त्रिशूल गाड़े गए हैं। प्रवेश द्वार के साथ बरामदा प्रदक्षिणा पथ का काम करता है। बरामदे के गवाक्षों में आकर्षक काष्ठ कार्य हुआ है। मंदिर के स्तंभों पर साँप चित्रित हैं।
दीवारों के पाषाण भी अलंकृत हैं, जिनमें कृष्ण तथा रामलीला के चित्रण उकेरे गए हैं। रावण की ओर हवा में बंदूकें भी चलती दिखाई गई हैं। ये कृतियाँ उन्नीसवीं शताब्दी की हो सकती हैं।

मंदिर के सामने नंदी की दो प्रतिमाओं के साथ कुछ घड़े हुए पत्थर भी हैं। प्रांगण में अठारह मीटर ऊँचा खंभा है, जिसे धजा या ध्वज कहा जाता है। ध्वज में झंडा लगा रहता है। यदि इस खंभे पर कभी बिजली गिरे और यह जल जाए या नई छत पड़े या काहिका हो; देवता की बताई विधि से इसे पुनः गाड़ा जाता है। ऐसे ऊँचे-ऊँचे ध्वज कई मंदिरों के आगे यहाँ दिखाई देते हैं। बिजली महादेव का ध्वज कुल्लू के मंदिरों में संभवतः सबसे लंबा है। कुछ वर्ष पहले मंदिर में आग लगने से बहुत-सी काष्ठकला नष्ट हो गई थी।
History of Bijli mahadev temple in hindi


कहा जाता है कि शिवलिंग पर कुछ समय के अंतराल के बाद बिजली गिरती है और शिवलिंग टूट जाता है। शिवलिंग के टुकड़े हर जगह जा गिरते हैं, जिन्हें पुजारी उठाकर मक्खन से जोड़ता है। बिजली गिरने की यह घटना प्रतिवर्ष या बारह वर्ष के बाद होनी मानी जाती है। किंतु कोई भी ऐसा जीवित वृद्ध व्यक्ति नहीं मिला जिसने यह घटना अपने जीवनकाल में देखी हो। बस, लोककथा की भाँति यह घटना यात्रा कर रही है।
अब बिजली महादेव के लिए नग्गर से होती हुई सड़क बन गई है। वैसे यह मंदिर कुल्लू के ठीक सामने पहाड़ी के अंतिम छोर पर स्थित दिखाई पड़ता है। बिजली महादेव का मंदिर मथाण गाँव में है।
Bijli mahadev का रथ


देवता का गूर श्री रामनाथ, कारदार श्री राजेश कुमार व श्री दुनीचंद तथा पुजारी श्री जयकृष्ण है। देवता का फेटा रथ पाँच छत्रों से भासित है, जिसे चार व्यक्ति दो अर्गलाओं की सहायता से उठाते हैं। रथ में कुल चौबीस मोहरे सुसज्जित हैं, जिनमें से तीन सोने के, चार अष्टधातु के तथा सत्रह चाँदी के हैं। सभी मोहरे रथ के अग्रभाग में सुशोभित हैं।