आप सब कभी न कभी मंडी के प्रसिद्ध पंचवक्त्र महादेव मंदिर गए होंगे। और अगर नहीं भी गए तो शायद इंस्टाग्राम या किसी और सोशल मीडिया पर इस प्राचीन मंदिर की झलक ज़रूर देखी होगी। खासकर 2023 की बाढ़ के समय, जब यह मंदिर सुर्ख़ियों में रहा था।”लेकिन आपने देखा होगा कि यहाँ बाक़ी शिव मंदिरों की तरह शिवलिंग स्थापित नहीं है, बल्कि पंचमुखी महादेव की भव्य मूर्ति विराजमान है। इसके पीछे भी एक रोचक कथा कही जाती है।
कहा जाता है कि लगभग सन 1700 के आसपास मंडी में भयानक बाढ़ आई। उस प्रचंड बहाव ने पंचवक्त्र मंदिर में स्थापित शिवलिंग को अपने साथ उठाया और धर्मपुर के कांढापतन पहुँचा दिया। चमत्कार यह रहा कि इतनी भीषण बाढ़ आने के बाद भी शिवलिंग को ज़रा-सी खरोंच तक नहीं आई।
कांढापतन की पृष्ठभूमि के बारे में अनेक धार्मिक मान्यताएं एवं दंत कथाएं प्रचलित हैं जिनके अनुसार पांडवों ने अपने वनवास के दौरान लघु हरिद्वार कांडा पतन में, हरिद्वार का निर्माण किया था। पर यह निर्माण अधूरा ही छोड़ कर पांडव यहां से चल दिए जिसके पीछे यह कारण था कि जब पांडव यहां हरिद्वार का निर्माण कर रहे थे तो उन्हें पास के गांव ह्योलग से एक महिला की धान कूटने की आवाज सुनाई दी। इस आवाज को सुनते ही पांडवों को सवेरा होने का आभास हुआ और वे इस निर्माण को अधूरा छोड़ कर चले गए।
जब बाढ़ का पानी उतर गया और गाँववालों ने उस स्थान पर शिवलिंग को पाया, तो सब हैरान रह गए। ध्यान से देखने पर उन्हें आभास हुआ कि यह वही शिवलिंग है जो मंडी के पंचवक्त्र मंदिर की है। गाँववालों ने निश्चय किया कि इस दिव्य शिवलिंगको किसी उचित स्थान पर स्थापित किया जाए।
वे लोग शिवलिंग को उठाकर चल पड़े। चलते-चलते बीच रास्ते में लांगणा गाँव में जब वे लोग एक बौड़ी (जल-स्रोत) के पास पानी पीने रुके, तो उन्होंने शिवलिंग भी पास में रख दी। पानी पीने के बाद जब फिर से शिवलिंग उठाने की कोशिश की, तो वह एक इंच भी नहीं हिली। सब लोग समझ गए कि यही स्थान महादेव ने अपने वास के लिए चुना है।
लांगणा गाँव भौगोलिक दृष्टि से धर्मपुर तहसील के साथ पड़ता है, लेकिन राजस्व सीमा के अनुसार यह जोगिन्दरनगर तहसील में आता है। यूँ कहा जाए तो यह इलाका धर्मपुर और जोगिन्दरनगर – दोनों के बीच की सीमा पर स्थित है।
वहीं पर लोगों ने मिलकर एक मंदिर का निर्माण करवाया और आज वह स्थान पंचमुखी महादेव मंदिर के रूप में पूजित है। यहाँ दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह वही शिवलिंग है जिसे महादेव ने स्वयं अपनी इच्छा से यहाँ विराजमान किया।
Credit the cult of hills